Indira Gandhi Biography in Hindi

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Essay on Indira Gandhi in Hindi

Indira Gandhi Biography in Hindi- इंदिरा गांधी  भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री थी , जो भारत की राजनीती को नई दिशा देने वाली और एक दूरदर्शी महिला था आइये इंदिरा गाँधी जी के पुरे जीवन , शिक्षा , राजनितिक जीवन ,मृत्यु  के बारे में सविस्तार पढ़ेंगे |

इंदिरा गांधी जीवन परिचय | Indira Gandhi Biography in Hindi

इंदिरा गांधी फोटो
इंदिरा गांधी फोटो ( Indira Gandhi Biography in Hindi )

भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी  का जन्म 19 नवम्बर वर्ष 1917 को इलाहबाद  (प्रयागराज) में हुआ था |इन्हे “iron lady”  लौह महिला  के नाम से सम्बोधित किया जाता है | यह एक ऐसी विदुषी महिला थी, जो केवल भारती राजनितिक के शिखर पर ही नहीं अपितु विश्व राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाई |

इनके पिता पंडित जवाहर लाल नेहरू थे, जोकि स्वतन्त्र भारत के पहले प्रधानमंत्री थे | इंदिरा गांधी  3 बार 1966 से 1977 और चौथी बार 1980-1984 ( मृत्यु   तक ) तक भारत के प्रधानमंत्री रही | इंदिरा गाँधी अपने पिता के पग चिन्हों पर को ही अपना आदर्श मान कर चली और अपने पिता के सपने भारत को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने का कार्य को पूरा करने में अहम् योगदान दिया |

इंदिरा गांधी प्रारम्भिक जीवन: Indira Gandhi Biography in Hindi

श्रीमती इंदिरा गांधी का जन्म (19 नवम्बर वर्ष 1917) को एक धनाढ्य (धनि ) परिवार उत्तर प्रदेश के इलहाबाद में हुआ था | इनके दादा मोती लाल नेहरू और इनके पिता जवाहर लाल नेहरू वक़ालत से जुड़े हुए थे | इन दोनों का भारत की स्वतंत्रता में अहम् योगदान था | इनकी माता का नाम कमला नेहरू  था |

इनका पूरा नाम ‘इंदिरा प्रियदर्शिनी’ नेहरू था इनके परिवार में लोग इन्हे प्यार से ‘इंदु’ बुलाते थे | इनका परवरिश इनकी माता कमला कमला नेहरू की देख रेख हुआ इनकी माता का सुख इनको १८ वर्ष तक ही मिला क्यों की जब यह १८ वर्ष की हुई तो इनकी माता का लम्बे बीमारी के चलते निधन हो गया |

इनके पिता स्वतन्त्रा संग्राम से काफी व्यस्त रहते थे जिससे इनको समय कम दे पाते थे | लेकिन घर में राजनितिक माहौल होने के कारण इन्दिरा जी का इसका विशेष प्रभाव पड़ा | इनके घर आनंद भवन में कांग्रेस पार्टी की अनेक गतिविधियों का केंद्र था |

जिससे वहा पर बड़े – बड़े  नेताओं का आना जाना लगा रहता था जिनमे महात्मा गाँधी , लाल बहादुर शत्श्री , सरोजनी नायडू जी जैसे बड़े नेताओं का आना जाना लगा रहता था | जिससे इनके जीवन में राजनितिक गतिविधियों का विशेष प्रभाव पड़ा |

महात्मा गांधी जी से यह बहुत ही प्रभावित थी | महात्मा गाँधी जी के विचारो से प्रभावित हो कर इन्होने बाल अवस्था में ही बाल चरखा संघ की स्थापना की  उस समय इनकी उम्र मात्र 10 से 12 वर्ष ही रही हो गी |

1930 में असहयोग आंदोलन में कांग्रेस पार्टी की मदत के लिए युवा अवस्था में ही वानर सेना  बनाई और स्वतन्त्रा संग्राम में कार्यरत स्वतन्त्रता सेनानियों का सहयोग करना और जगह जगह पर विरोध प्रदर्शन करना झंडा जुलुस निकलना आदि कार्य करके सहयोग दिया|

यह शुरू से ही स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहीं और अपना विशेष योगदान दिया| इन्हे सितम्बर 1942 में कांग्रेस पार्टी की मदत और अंग्रेजो का विरोध करने के लिए इन्हे जेल भी जाना पड़ा | 1947 में गाँधी जी के नेतृत्व ने दिल्ली में दंगा भड़के क्षेत्रो में सहायता का कार्य भी किया |

26 मार्च 1942 को इंदिरा गाँधी  विवाह फिरोज गाँधी  के साथ हो गया, विवाह के बाद ही इंदिरा नेहरू से इंदिरा गांधी  इनका नाम हो गया | इनके पिता पहले इस विवाह के लिए राजी नहीं थे, परन्तु इंदिरा जी की जिद और गाँधी जी के सुझाव की वजह से ही इंदिरा गाँधी की  शादी फिरोज गाँधी  से हो पाई |

क्योकि इनके पिता चाहते ते की इंदिरा जी की शादी सजती परिवार में हो इसी का विरोध वह कुछ समय तक करते रहे, फिरोज गुजरात के पारशी समुदाय से ताल्लुक रखते थे और इंदिरा जी एक काश्मीरी ब्रह्मण  थी | विवाह के बाद इंदिरा गांधी जी को दो पुत्र की प्राप्ति हुई राजीव गांधी ,संजय गाँधी |

इनका वैवाहिक जीवन कुछ समय के बाद थोड़ा कड़वाहट भरा रहा, जब यह अपने पिता के साथ विदेश दौरे पर गई थी तभी इनके पति फिरोज गाँधी  का निधन 8 सितंबर 1960 को हो गया |

इंदिरा गांधी जी की शिक्षा :Indira Gandhi Biography in Hindi

इंदिरा गांधी  के  परिवार में लोग उस समय भी काफी पढ़े लिखें थे, इनके परिवार के लोग शिक्षा महत्व समझते थे| इसी लिए इंदु के शिक्षा का विशेष प्रबन्ध किया गया था उस समय भी इनके परिवार के पास पैसे की कोई कमी नहीं थी |

इंदिरा जी 1934-1935 में स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद शांतिनिकेतन में रविंद्रनाथ टैगोर  जी द्वारा स्थापित विश्व-भारती विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया |

कुछ लोगो का यह भी मानना ही की “प्रियदर्शिनी” नाम रविंद्रनाथ टैगोर  जी ने ही दिया था | शांतिनिकेतन में शिक्षा पूरी करने के बाद यह लन्दन चली गई और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय  की प्रवेश परीक्षा में बैठी परन्तु उसमे वह सफल नहीं हो पाई |  ब्रिस्टल के बैडमिंटन स्कूल में कुछ समय बिताने के पश्चात 1937 में पुनः प्रवेश परीक्षा दिया जिसमे वह सफल रही और वहां पर उन्होंने प्रवेश लिया |

इन्होने शांति निकेतन,(समरविले कॉलेज) ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के आलावा इकोले इंटरनेशनेल,जिनेवा, पूना और बंबई में स्थित प्यूपिल्स ओन स्कूल, जैसे प्रमुख संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की| इन्हे विश्व के प्रमुख संस्थानों द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया था | प्रतिभाशली शैक्षिक पृष्ठभूमि के कारन कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा विशेष योग्यता प्रमाण दिया गया |

इंदिरा गाँधी का राजीतिक जीवन एवं कैरियर

इंदिरा गाँधी  स्वतन्त्र भारत की पहली महिला प्रधान मंत्री थी, इनका राजनितिक जीवन बड़ा ही उतार चढ़ाव भरा रहा और इन्होंने भारत की राजनीती में ही नहीं अपितु विश्व राजनीती के पटल पर भी अपना लोहा मनवाया था | जब लाल बहादुरशास्त्री जी का आकस्मिक निधन हो गया तो कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के कामराज  ने इंदिरा जी को प्रधान मंत्री बनाने में अहम् योगदान दिया | इन्ही के सहयोग से इंदिरा गांधी जी को प्रधान मंत्री बनाया गया |

1959 और 1960 में इंदिरा गांधी जी चुनाव लड़ी और भारती कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गयीं | इनका कार्य काल विवादों से भरा रहा | उस समय वह अपने पिता पंडित जवाहर लाल नेहरू  के साथ सहायक के रूप में भी कार्य किया |

27 मई 1964 को जवाहर लाल नेहरू का निधन हो गया | इसके उपरांत लाल बहादुर शास्त्री जी को प्रधानमंत्री बनाया गया और इन्ही की प्रेरणा से इंदिरा जी चुनाव लड़ी और जितने के बाद तत्काल तत्काल सूचना और प्रसारण मंत्री के लिए नियुक्त हो सरकार में शामिल हो गई।

इंदिरा गांधी का राजनितिक जीवन बड़ा ही संघर्ष पूर्ण भरा रहा, इन्होने अपने राजनितिक जीवन की प्रेरणा अपने पिता जी से मिली थी | इनके पिता पंडित जवाहर लाल नेहरू भारती राजनितिक के प्रमुख स्तम्भ थे | इन्होने भारत की स्वतंत्रता में अहम् योगदान दिया |

इनके राजनितिक जीवन में महत्मा गाँधी जी का भी अहम् योगदान है यह पंडित नेहरू जी के साथ महात्मा गाँधी जी से बहुत प्रभावित थी और उनके आदर्शो पर चलने की कोशिश करती रही | बाल्य अवस्था में ही गाँधी जी प्रभावित हो कर इन्होने बाल चरखा संघ की स्थापन कर दी | यह संघ कंग्रेसियो की  मदत करता और उनसे प्रेरणा लेकर लोगो को जागरूक करता |

इंदिरा गांधी जी, गाँधी जी से प्रभावित हो कर गाँधी जी के साथ इन्होने असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया | स्वतंत्रता  आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के चलते इन्हे 1942 में जेल में भी जाना पड़ा | कुछ समय जेल मे बिताने के बाद राष्ट्रीय कांग्रेशियो  के विरोध को देख कर अंग्रेजी सरकार को झुकना पड़ा और इंदिरा गांधी को जेल  से मुक्त करना पड़ा |

वर्ष 1965 में भारत पाकिस्तान युद्ध चल रहा था| उस समय इंदिरा गांधी जी श्रीनगर सीमा में ही उपस्थित थी और पाकिस्तानी सेना सीमा के काफी निकट थी | हलाकि भारती सेना के अधिकारियो ने पाकिस्तानी सेना की  इस स्थिति से उन्हें अवगत कर दिया था | परन्तु इंदिरा गांधी जी इससे तनिक भी विचलित नहीं हुई और उन्होंने वही रुकने का निर्णय लिया और लोकल गवर्मेंट में मिलकर प्रधानमंत्री से विचार विमर्श करके समझौते का रास्ता निकला |

तस्कंध में सोबियत संघ के मध्यस्ता में पाकिस्तान के अयूब खान के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्ष कर दिया| हस्ताक्ष करने के कुछ समय के पाश्च्यात ही लाल बहादुर जी आकस्मिक निधन हो गया|

लाल बहादुर शास्त्री जी के निधन के बाद इंदिरा गांधी को भारत का प्रधानमंत्री कांग्रेस पार्टी द्वारा नियुक्त किया गया| जब इंदिरा गांधी को कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री बनाया तो कांग्रेस में काफी मतभेद की स्थिति पैदा गई| कांग्रेस पार्टी के लोग दो गुटो मे बट गए ,एक गुट समाजवादी गुट इंदिरा गाँधी जी के नेतृत्व में दूसरा गट मोरारजी देसाई के नेतृत्व में रूढ़िवादी गुट में बट गई | मोरार जी देसाई इन्हे गूँगी गुड़िया कहते थे |

पार्टी के आंतरिक मतभेद के कारण कांग्रेस पार्टी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा और इसका परिणाम यह रहा की कांग्रेस 554 सीटों में से 6० सीटों का नुकसान सहकर 297 सीटों पर ही सिमट गई | जिसके कारण उन्हें मोरारजी देसाई को भारत के उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के रूप में लेना पड़ा। 1969 में मोरारजी साथ अनेक विचारो असहमति बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस विभाजित हो गयी| किसी प्रकार से साम्यवादी दलों से समर्थन पाकर अगले दो वर्षों तक शासन चलाई। इसी वर्ष (जुलाई 1969 ) इंदिरा बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया।

इन्होने 1971 में पाकिस्तान को करारी शिकस्त देकर उसको दो टुकड़ो में बाट दिया जिससे बांग्लादेश की उतपत्ति हुई | इनकी राजनितिक सूझ भुझ ही थी जिससे बांग्लादेश का निर्माण हुआ |इन्होने ने अपने राजनितिक सूझ बुझ से बड़े राष्ट्रों की परवाह न करते हुए , अपने कार्यकाल में ही राजस्थान के पोखरण में परमाणु परिक्षण 18 मई, 1974 को किया|

जिसका परिणाम यह रहा की कई देशो के विरोध का सामना करना पड़ा, परन्तु इनके इरादों को कोई भी डिगा न सका |अन्तरिक्ष अनुसन्धान एवं सूचना क्रान्ति की आवश्यकता को देखते हुए 1 अप्रैल, 1975 को भारत का प्रथम उपग्रह आर्यभट्ट  का प्रक्षेपण हो सका|

इंदिरा गांधी के कार्यो को देख कर 1972 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया | इंदिरा गांधी जी का राजनितिक जीवन विवादों से भरा भी रहा, इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा उनके चुनाव को अवैध घोषित करार दिया जिससे क्षुब्ध होकर इन्होने 26 जून 1975 को देश में आपात काल लागु कर दिया  |

इस आपातकाल का परिणाम सामने आया की इनको 1977 के चुनाव में बुरा शिकस्त मिला परन्तु इन्होने हर नहीं मानी, इन्होने अपनी राजनितिक दूरदर्शिता के चलते 1980 के चुनाव में असाधारण सफलता से 14 जनवरी 1980 को पुनः देश की प्रधानमंत्री बनीं |

इन्होने अपने दूसरे कार्यकाल में गरीबी हटाओ  का नारा दिया | पंजाब के अलगावादी आतंकवादी ग्रुप के नेता जरनैल सिंह भिंडरावाले   सिख धर्म  के पवित्रतम तीर्थ, हरिमन्दिर साहिब परिसर के भीतर तैनात हो गया। स्वर्ण मंदिर परिसर में इनके आलावा बहुत ज्यादा में नागरिक लोग भी मौजूद थे परन्तु इंदिरा जी ने इनकी परवाह न किये बिना ही सेना के अधिकारियो को आदेश दिया की वहां पर छिपे आतंकियों का सफाया किया जाये इस ऑपरेशन को ही ‘ ब्लू स्टार ‘ नाम दिया गया |

इस ऑपरेशन में कहा जाता है की कुछ सिख नागरिको को भी नुकसान हुआ जिससे लोगो के अंदर बड़ा ही असंतोष था | इस ऑपरेशन से छुब्ध हो कर इनके दो शिख अंगरक्षक ( बेअंतअ सिंह व सतवंत सिंह ) ने 31 अक्टूबर 1984 ई॰  को उन्हें गोलियों से भून दिया | बेअंतसिंह  को उसी समय गोली मर दिया गया और सतवंत सिंह  को गोली मर कर गिरफ़्तार कर लिया गया | इस प्रकार से हमारे देश का ही नहीं अपितु विश्व की राजनीति का चमकता सितारा सदैव के लिए बादलो की आगोश में समा गया और फिर कभी वापस नहीं दिखाई दिया |

इंदिरा गांधी जी आज हमारे बिच सशरीर नहीं है परन्तु उनके द्वारा किया गया कार्य और बलिदान हमेशा ही हम लोगो का प्रेरित और मार्गदर्शन करता रहेगा| भारत को विश्व गुरु बनाने में अहम् योगदान देता रहेगा |

इंदिरा गांधी जीवन परिचय के माधयम से हमने उनके प्रारंभिक जीवन , राजनितिक जीवन और घटनाओ पर प्रकाश डाला है | 

मुझे उम्मीद है कि आप को हमारा यह आर्टिक्ल – Indira Gandhi Biography in Hindi इंदिरा गांधी जीवन परिचय लेख पसंद आया होगा | आप अपने सुझाव और विचार कमेंट के माध्यम से दे सकते है |

Essay on ‘Indira Gandhi’ in Hindi.

धन्यवाद !

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