Lal Bahadur Shastri Jayanti | जीवन परिचय 2022

LAL BAHADUR SHASTRI JAYNATI

Lal Bahadur Shastri Jayanti -जीवन परिचय

लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती ( Lal Bahadur Shastri जयंती ) -2 अक्टूबर को मनाई जाती  है, इसी दिन महात्मा गाँधी जी की भी जयंती मनाई जाती है ,आगे हम LAl Bahaur shastri jayanti in hindi  के माध्यम से शास्त्री जी के बारे में हिंदी में हम उनका जीवन परिचय और उनके सामाजिक और राजनितिक जीवन पर प्रकाश डालेंगे| 

Lal Bahadur Shastri Jayanti - जीवन परिचय

Lal Bahadur Shastri Jayanti Details and Biography in Hindi 

  •  जन्म : 2 अक्टूबर 1904
  •  मृत्यु -11 जनवरी 1966
  •  जन्मस्थान -मुग़ल सराय -वाराणसी ,उत्तर प्रदेश
  •  मृत्यु स्थान -ताशकन्द -सोवियत संघ रूस

प्रारम्भिक जीवन और Lal Bahadur Shastri Jayanti कब मानते है|

लालबहादुर शास्त्री जी का जन्म वाराणसी के निकट मुगलसराय में हुआ था वर्ष 1904 -2 अक्टूबर को हुआ था और उनकी मृत्यु 11 जनवरी 1966 को ताशकन्द में हुआ था,इनका जन्म ब्राह्मण कायस्थ परिवार में हुआ था,इनके पिता का नाम मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव था| जो प्राथमिक विद्यालय में अध्यापक थे,लोग उन्हें मुंशी जी के नाम से भी जानते थे,क्यों की उस समय अध्यापक को लोग मुंशी जी कहकर सम्बोधित करते थे कुछ समय के बाद उनको राजस्व विभाग में नौकरी मिल गई और वहां पर उन्होंने  क्लर्क के पोस्ट पर नौकरी कर ली|

लालबाहदुर शास्त्री जी (Lal Bahadur Shastri) की माता का नाम रामदुलारी था,लालबाहदुर शास्त्री का बचपन का नाम नन्हे था|क्यों की वह अपने भाई बहनो में सबसे छोटे थे इस लिए लोग प्यार से नन्हे बुलाते थे|

शास्त्री जी का बचपन बहुत ही कस्टमय था क्यों की जब वह 18 महीने के ही थे तभी उनके पिता जी का देहंदत हो गया था,अब उनके पालन पोषण की सारि जिम्मेदारी उनकी माता जी पर आगई,अब उनकी माता जी बिलकुल ही निःसहाय हो गई इस लिए उन्होंने निर्णय लिया और अपने बच्चो को लेकर अपने पिता हजारीलाल के पास मिर्जापुर चली गई,कुछ समय के उपरांत उनके नाना जी हजारी लाल भी चल बसे|अब इन लोगो का जीवन बड़ा ही संघर्ष पूर्ण था। इन लोगो की यह हालत देख कर इनके मौसा जी ने इनका बहुत ही सहयोग किया|

हम सब Lal Bahadur Shastri Jayanti  2अक्टूबर को हर वर्ष मानते है,स्वतंत्र भारत के दूसरे प्रधान मंत्री के पद पर रहे और भारत को प्रगति के मार्ग पर अग्रषित करने में विशेष योगदान दिया|

लालबहादुर शास्त्री की प्रारम्भिक शिक्षा- Lal Bahadur Shastri Jayanti 

इनकी प्रारम्भिक शिक्षा इनके ननिहाल मिर्जापुर में ही हुई,इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए ये वाराणसी आये और हरिश्चन्द्र हाई स्कूल और काशी विद्यापीठ में उच्च शिक्षा की पढ़ाई पुरी हुई। कशी विद्यापीठ से शास्त्री की डिग्री 1962 में हासिल की|

शास्त्री की डिग्री मिलने के उपरांत इन्होने अपने नाम के बाद शास्त्री लगाना शुरू कर दिया और कुछ समय के बाद इन्होने अपने नाम श्रीवास्तव जो की एक जाती सूचक था उसे हटा कर अपना टाइटल शास्त्री कर दिया जो की आज भी उनके वंसज यही टाइटल उपयोग करते है|

इनकी शादी वर्ष 1928 मई 16 को गणेशप्रसाद की पुत्री ललिता देवी जी से हुई,इनको कुल छ: सन्तानें हुईं,जिनमे दो बेटियां और चार पुत्र। दोनों बेटियों -कुसुम व् सुमन और पुत्र हरिकृष्ण शास्त्री,अनिल शास्त्री,सुनील शास्त्री,व् अशोक शास्त्री | इनके पुत्रो में दो दिवंगत हो चुके है और दो अभी भी है जो की राजनीती में एक भारती जनता पार्टी में -सुनील शास्त्री और अनिल शास्त्री कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के पद पर है |

राजनीतिक संघर्ष और उपलब्धियां

शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) जी संस्कृत से स्नातक की शिक्षा पूर्ण करने के बाद भारत सेवक संघ से जुड़े और यही से देश सेवा करने का निर्णय लिया। अपने राजनितिक संघर्ष की सुरुवात की।शास्त्री जी ईमानदार गाँधीवादी नेता थे, इन्होने अपना जीवन गाँधी जी की तरह सादगी के साथ बिताया और अपना जीवन गरीबो की सेवा में न्यौछावर कर दिया | भारत की आजादी में इनका महत्पूर्ण योगदान रहा|

गाँधी जी द्वारा चलाये गए आंदोलनो में इन्होने ने बढ़ – चढ़ कर हिस्शा लिया जिससे इन्हे कई बार जेल भी जाना पड़ा,स्वतंत्रता संग्राम के सभी आंदोलन में इनकी विशेष भूमिका भी रही चाहे वह 1921 का असहयोग आंदोलन हो या फिर १९३० का दांडी यात्रा – मार्च या फिर 1942 में भारत छोडो आंदोलन हो |

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इंग्लैण्ड को बुरी तरह उलझता देख कर सुभाष चंद्र बोस जी ने आजाद हिन्द फौज को “दिल्ली चलो” का नारा दिया,और इसी मौके को समझे हुए गाँधी जी ने 8 अगस्त 1942 की रात में ही बम्बई से “अँग्रेजों भारत छोड़ो” व भारतीयों को “करो या मरो” का आदेश जारी किया दिया सरकारी सुरक्षा के लिहाज से गाँधी जी आगा खान पैलेश पुणे  में चले गए और शास्त्री जी ने मौके की नजाकत को समझते हुए 9 अगस्त 1942 के दिन इलहाबाद पहुंच गए और गाँधीवादी नारे को “मरो नहीं, मारो!” में बदल दिया| ग्यारह दिन तक भूमिगत रहते हुए यह आंदोलन चलाया और उसके उपरांत 19 अगस्त 1942 को लालबाहदुरशास्त्रीजी गिरफ्तार हो गये।

शास्त्री जी के राजनितिक दिग्दर्शकों में में पुरुषोत्तमदास टंडन और पण्डित गोविंद बल्लभ पंत के साथ ही साथ पंडित नेहरू जी का भी अहम् योगदान है,जब शास्त्री जी 1929 में इलहाबाद आने के बाद टंडनजी के साथ भारत सेवा संघ की इलाहाबाद इकाई के सचिव के रूप में काम करना शुरू किया|

यहाँ पर रहते हुए नेहरू जी से इनकी निकटता बढ़ी और एक समय ऐसा भी आया की इन्हे नेहरू जीके मंत्री मंडल में गृहमन्त्री के प्रमुख पद तक जा पहुँचे और उसके बाद ऐसा भी समय आया जब नेहरू जी का निधन हुआ तो भारत के प्रधान मंत्री भी बने|

शास्त्री जी अपनी साफ सुथरी ईमानदार छवि के कारण उन्हें भारत का प्रधानमंत्री 1964 में बनाया गया,लेकिन उस समय देश अकाल से जुछ रहा था जिससे भुखमरी बढ़ रही थी इस लिए शास्त्री जी ने सर्वप्रथम प्राथमिकता खाद्यान्न मूल्यों को बढ़ने से  रोकने के लिए किया जिसमे वह सफल भी रहे|

जिस समय इन्हे प्रधानमंत्री बनाया गया उस समय देश की हालत अच्छी नहीं थी,पूँजीपति देश हम पर हमले की फिराक में हमेसा रहते थे 1965 में पाकिस्तान ने कुछ अन्य देशो का अंदरूनी सहारा लेकर भारत पर सायं 7.30 बजे हवाई हमला कर दिया, इसके बाद तीनो सेनाओ की आपात कालीन बैठक हुई और उन्होंने पूछा की क्या करना चाहिए ,शास्त्री जी ने एक ही स्वर में कहा आप देश की रक्षा करे और हमें कोई और सुझाव है तो वो भी बताइये इससे यह प्रतीत होता है की शास्त्री जी एक कुशल नेतृत्व क्षमता वाले व्यक्ति थे |

इनकी कुशल नेतृत्व क्षमता की बात करे तो इन्होने देश को एक साथ जोड़ कर रखा और देश को जय जवान-जय किसान का नारा दिया जिससे सभी देश वासियो का मनोबल बढ़ा और सारा देश एक शक्ति के रूप में खड़ा हो गया | इनकी कुशल नेतृत्व क्षमता और इनका योगदान इस भारत देश को आगे ले जाने में अहम् रहा है इसी लिए हम हर वर्ष 2 अक्टूबर को  Lal Bahadur Shastri Jayanti के रूप में उनको याद  करके उनको श्रद्धांजलि देते है |

Lal Bahadur Shastri Quotes/slogan in Hindi –लाल बहादुर शास्त्री के महान विचार

  • जय जवान, जय किसान 
  • यह बेहद महत्वपूर्ण है कि हम अपने देश के सबसे बड़े दुश्मन गरीबी और बेरोजगारी से लड़ें|
  • हमारा देश आजाद हो गया है| पर पूरी तरह से नही, अभी भी बहुत सारा काम करना बाकी है|
  • हम केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए शांति और शांतिपूर्ण विकास में विश्वास रखते है|
  • अगर इस देश में किसी भी व्यक्ति को अछूत कहा जाता हैं,तो भारत को अपना सर शर्म से झुकाना पड़ेगा|
  • अपने देश की आजादी की रक्षा करना केवल सैनिको का काम नहीं, बल्कि ये पूरे देश का कर्तव्य है|
  • मैं जितना साधारण दिखता हूँ, उतना साधारण हूँ नहीं |

Lal Bahadur Shastri Death रहस्यपूर्ण मृत्यु

जब पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण किया तो भारत ने उसका मुँह तोड़ जबाब दिया और इसका नतीजा यह रहा की भारत की सेना लाहौर तक जा पहुंची जब अमेरिका ने यह देखा कि भारत की सेना लाहौर तक पहुंच गई है तो अमेरिका ने वहा पर मौजूद अमेरिकियों को बचने के लिए कुछ समय के लिए युद्ध विराम की माँग की |

अमेरिका और रूस दोनों के बीच में आ जाने से भारत के प्रधानमंत्री लालबाहदुर शास्त्री जी के ऊपर दबाव बनाकर ताशकंद समझौते के लिए रूस बुला लिया गया, अंतर्राष्ट्रीय दवाब में आकर शास्त्री जी ने युद्ध विराम के हर समझौता को स्वीकार कर लिया और समझौतो पर हस्ताक्षर भी कर दिया पर पाकिस्तान से जीती हुई जमीन वापस करने से माना कर दिया |

पाकिस्तान के उस समय के प्रधान मंत्री अयूब खान के साथ युद्ध विराम पर समझौते पर हस्ताक्षर होने के कुछ घंटे बाद ही लाल बहादुर शास्त्री जी का रहस्यमई तरीके से निधन ( मृत्यु ) हो गया| 11 जनवरी 1966 की वह रात थी जब भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबाहदुर शास्त्री जी का मृत्यु हो गया |

शास्त्री जी की मृत्यु के बारे में किसी को भी सही जानकारी नहीं है की उनकी मृत्यु का कारण आखिर क्या था,कुछ लोग कयास लगाते है की उनको जहर दे कर मारा गया था तो कुछ लोग हार्ट अटैक बताते है।

इनके मृत्यु के बाद इनका पार्थिव शरीर भारत लाया गया ,शांतिवन यमुना नगर के किनारे पुरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम बिदाई दी गई जिस जगह पर उनको विदाई दी गई आज उसको लोग विजय घाट नाम से जानते है|

लाल बहादुर शास्त्री का राजनितिक जीवन काल लगभग 30 वर्षो का रहा, इतने लम्बे अनुभव में बहुत ही उतार चढ़ाव आया पर वह अपने ईमानदारी निष्ठा और अपने संकल्प के बल पर उन्होंने जो संकल्प लिया था की भारत को अंग्रजी हुकूमत से मुक्त करने का उसमे वह पूरी तरह से सफल रहे।

उन्होंने अपने  सादा जीवन और उच्च विचारो से लोगो के ह्रदय में उच्चतम  स्थान प्राप्त किया और लोगो के चहेते बन गए, वे दूरदर्शी थे इसी लिए भारत को प्रगति के मार्ग पर लेके आगे आये इसी दूरदर्शिता से ही वह अपने और देश के मार्ग में आए बड़ी से बड़ी बाधाओ को पराजित किया और देश को प्रगति की ओर ले आये |

भारत की राजनीती में इनका अहम् योगदान हैं, भारत के लोग इनके कार्यो और योगदान को कभी नहीं भूल सकते इसी लिए भारती हर वर्ष 2अक्टूबर को Lal Bahadur Shastri jayanti  के रूप में मानते हैं|

मुझे उम्मीद है कि दोस्तों आपको Lal Bahadur Shastri Jayanti -जीवन परिचय का यह निबंध / लेख पसंद आया होगा|
और यह भी पढ़ें' ....Mahatma Gandhi in Hindi- जीवन परिचय 

धन्यवाद !

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