Sarojini Naidu Biography in Hindi | सरोजिनी नायडू जीवन परिचय

Sarojini Naidu Hindi
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सरोजिनी नायडू कैसे बनी स्वतंत्र भारत कि पहली महिला राज्पाल ? Sarojini Naidu Biography in Hindi में हम सरोजनी नायडू के जीवन , उनके योगदान और उनकी हिंदी और इंग्लिश की कविताओं के ऊपर भी प्रकाश डालेंगे | Sarojini Naidu Biography in Hindi के  माधयम से जानेंगे  कि ये कैसे प्रसिद्ध हुई “द नाइटिंगेल ऑफ इंडिया “  और भारत कोकिला के नाम से  | 

जीवन परिचय| Sarojini Naidu Biography in Hindi

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स्वतंत्र भारत की पहली महिला गवर्नर सरोजनी नायडू का जन्म भारत के हैदराबाद नगर में 13 फरवरी  1879 में हुआ था | इनके पिता जी का नाम अघोरनाथ चट्टोपाध्याय था |   जो कि एक बहुत ही विद्वान व्यक्ति थे  |  इनकी माता का नाम वरदा सुंदरी था |  जो एक कवित्री थी |  वह बांग्ला भाषा में कविताएं लिखा करती थी | 

सरोजनी नायडू को लोग द नाइटिंगेल ऑफ इंडिया के नाम से भी जानते है | साथ ही साथ भारत कोकिला के नाम से भी जाना जाता है |

सरोजनी नायडू की बुद्धि बचपन में ही बहुत कुशाग्र थी | यह बचपन से ही पढ़ने में  बहुत अत्यधिक रूचि रखती थी | यह 12 साल की कम आयु में ही दसवीं के परीक्षा  बहुत अच्छे  अंको से उत्तीर्ण कर ली | 

जब यह मात्र 13 वर्ष की थी तब इन्होंने लेडी ऑफ द लेक नाम की कविता लिख दिया था |यह पढ़ने में बहुत अधिक अच्छी थी |

जब यह मात्र 14 वर्ष की हुई तब भी इन्होंने लगभग सभी अंग्रेजी कविताओं की रचनाओं का अध्ययन कर लिया था | इनकी कविताओं से प्रभावित होकर हैदराबाद के निजाम ने 1895 में इन्हें वजीफे पर लन्दन भेज दिया | सरोजनी नायडू प्रतिभावान छात्रा थी | सरोजिनी नायडू हिंदी , इंग्लिश के अलावा बांग्ला ,उर्दू, तेलुगु और फारसी भाषाओं का अच्छा ज्ञान था  | 

इन्हें भारत कोकिला के नाम से भी जाना जाता है|  क्योंकि उन्होंने बहुत ही कम उम्र से कविताएं लिखना प्रारंभ कर दिया था |

जब यह मात्र 13 वर्ष की हुई उस इस उम्र में भी इन्होंने 13 सो पदों की ‘द लेडी ऑफ लेक’  नाम की लंबी कविता लिख दिया था |

 इन्होंने अंग्रेजी भाषा में लगभग 2000 पंक्तियों का विस्तृत नाटक  लिख कर यह साबित कर दिया था यह अंग्रेजी भाषा के ऊपर इनका पूरा नियंत्रण और अधिकार  सिद्ध करता है |  उसी समय ही इन्होंने अपने कवित्री होने का सार्वजनिक परिचय और ऐलान कर दिया था |

उनके पिताजी चाहते थे, कि यह एक वैज्ञानिक या गणितज्ञ बने परंतु इनकी रूचि वैज्ञानिक बनने में कम और एक कवित्री बनने में अत्यधिक दिखाई पड़ती थी | यह बहुत ही प्रतिभावान छात्रा थी | 

सरोजिनी नायडू अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद हैदराबाद के निजाम के द्वारा दिए गए वजीफे पर  उच्च शिक्षा के लिए यह लंदन पहुंच गई |  यहां पर इन्होंने पहले किंग कॉलेज और बाद में कैंब्रिज   के  गिर्टन कॉलेज में अध्ययन किया |

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में इनकी भूमिका

 सरोजनी नायडू 18 95 ईस्वी में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए इंग्लैंड और अपने पढ़ाई के साथ साथ कविताएं भी लिखती रही | पहला कविता संग्रह गोल्डन थ्रेसोल्ड के नाम से जाना जाता है, दूसरी कविता संग्रह वर्ल्ड आफ टाइम  और इनकी तीसरी कविता संग्रह ब्रोकन विंग इन्हें एक मशहूर कवित्री बना दिया |

 उस समय आपने कविताओं से बहुत ही सुप्रसिद्ध कवित्री बन चुकी थी | सरोजिनी नायडू का विवाह डॉक्टर गोविंदराजुलू  नायडू से 1898 में हुआ |

 सरोजिनी नायडू पहली बार गांधी जी से इंग्लैंड में मिली थी| जब यह 1914 जब गांधी जी से पहली बार मिली  | गांधी जी के विचारों से यह बहुत ही प्रभावित हुई गांधी जी को अपना आदर्श मानकर स्वयं को भी देश सेवा के लिए समर्पित हो गई | एक कुशल सेनापति की तरह इन्होंने अपनी क्षमता और प्रतिभा का परिचय हर क्षेत्र में दिया है चाहे वह सत्याग्रह हो या वह किसी प्रकार की संगठन की बात हो इन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा हर क्षेत्र में मनवाया |

 इन्होंने अनेक राष्ट्रीय आंदोलनों का नेतृत्व किया और इन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा | यह आजादी के जिस लड़ाई में कूदि  थी उस लड़ाई का मार्ग इतना आसान नहीं था | परंतु यह एक वीर वीरांगना की भांति  कभी ना हार मानने वाले लड़ाई की तरह या अपनी लड़ाई लड़ रही थी|

 इन्हें कई आंदोलनों और संगठनों के चलते कई बार संकटो  का भी सामना करना पड़ा | परंतु यह संकटों से कभी घबराए नहीं   बल्कि एक सच्चे स्वतंत्रता सेनानी के सिपाही की भांति यह गांव- गांव में घूम कर लोगों को जागृत करना,  लोगों के मन में देश प्रेम का अलख जगाना और सभी देशवासियों को देश के प्रति उनके कर्तव्यों कोयद दिलाना आदि कार्य किया |

एक निडर और साहसी  नेता थी जब वह भाषण देना शुरू  करती थी , तो इन्हे सुनने के लिए हजारों – हजारों की भीड़ इकट्ठा हो जाती थी | यह अपने वक्तव्य से भारत की सोई हुई जनता के अंदर एक नया उमंग और विश्वास भर देती थी | जिससे लोगों को देश के प्रति उनके कर्तव्यों को याद दिलाती थी |  आजादी की लड़ाई  लड़ने के लिए उन्हें उत्साहित  करती थी |

 सरोजनी नायडू जी को कई भाषाओं का अच्छा ज्ञान था | यह जिस क्षेत्र में जाती थी , उस क्षेत्र में वहां की प्रमुख भाषा में ही भाषण देती थी  | जिससे वहा के लोगो के ऊपर एक विशेष प्रभाव पड़ता था | इन्हें हिंदी, अंग्रेजी,गुजराती, बांग्ला बहुत ही अच्छी तरीके से आता था|  यह लंदन की सभाओं में अंग्रेजी में भाषण देकर वहां उपस्थित श्रोता गणों को मंत्र मुक्त कर देती थी |

इनकी लोकप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ती  रही जिसके कारण 1925 में कानपुर में हुए अधिवेशन कि यह अध्यक्ष  बनी |  1932 में यह भारत की ओर से प्रतिनिधि बनकर दक्षिण अफ्रीका भी गई  |  जब भारत आजाद हुआ उसके बाद यह उत्तर प्रदेश की पहली राज्यपाल बनी |  इन्हें देश का पहला महिला राज्यपाल बनने का गौरव भी प्राप्त हुआ |

श्रीमती एनी बेसेंट की प्रिय मित्र और गांधी जी के प्रिय शिष्या के रूप में अपना सारा जीवन देश के नाम समर्पित कर दिया | 2 मार्च 1949 को इनका देहांत हुआ |

 भारत सरकार ने सरोजिनी नायडू को याद करते हुए 13 फरवरी 1964 को  इनकी  जयंती के अवसर पर इन के सम्मान में 15 नए पैसे का एक डाक टिकट भी जारी किया | 

 राज्यपाल के रूप में सरोजनी नायडू

 जब भारत अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ आजादी के बाद सभी बड़े नेताओं को भारत के निर्माण का उत्तरदाई उनके कंधों पर आ गया |  जिसमें कुछ बड़े नेताओं को सरकारी तंत्र के साथ जुड़ने और प्रशासन में नौकरियां दी गई | 

कुछ को समाज सेवक के रूप में जुड़कर समाज और राष्ट्र को नई दिशा देने का कार्य सौपा गया |  जिनमें सरोजनी नायडू का भी नाम आता है , इन्हें उत्तर प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया | 

उत्तर प्रदेश विस्तार और जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा प्रांत है |  उन्होंने इस पद को स्वीकार करते हुए कहा कि ” मैं खुद को एक जंगल के पक्षी की तरह कैद कर दिए गया महसूस कर रही हूँ | 

परंतु उन्होंने पंडित जवाहरलाल जी की इच्छा को टाल  ना सकी | जवाहरलाल नेहरू के प्रति उनके मन में प्रेम और स्नेह था | 

उनके इस आग्रह के बाद यह उत्तर प्रदेश की राज्यपाल बनी और लखनऊ में जाकर बस गई और वहीं पर अपना राजनीतिक जीवन व्यतीत किया | यह 2 मार्च 1949 को अपने पार्थिव शरीर को त्याग दिया और अमर हो गई  | 

Sarojini Naidu Hindi में जाना कि यह स्वतंत्र भारत कि पहली राज्यपाल कब और कैसे बनी |

सरोजिनी नायडू की हिंदी में संक्षिप्त जानकारी | Sarojini Naidu Short Information in Hindi

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सूचि    जानकारी 
नाम सरोजिनी नायडू
पिता  अघोरनाथ चट्टोपाध्याय
माता  वरद सुंदरी
पति डॉ. गोविन्द राजालु नायडू
जन्म 13 फरवरी 1879
जन्म स्थान हैदराबाद ( भारत )
मृत्यु 2 मार्च 1949

Best Sarojini Naidu Poems In Hindi | सरोजिनी नायडू की कविताएं

अब हम लोग Sarojini Naidu Hindi में सरोजिनी नायडू द्वारा लिखी कुछ हिंदी और इंग्लिश कि कविता पर प्रकाश डालते है |

Sarojini Naidu Hindi Poems – The Gift of India

क्या यह जरूरी है कि मेरे हाथों में
अनाज या सोने या परिधानों के महंगे उपहार हों?
ओ ! मैंने पूर्व और पश्चिम की दिशाएं छानी हैं
मेरे शरीर पर अमूल्य आभूषण रहे हैं
और इनसे मेरे टूटे गर्भ से अनेक बच्चों ने जन्म लिया है
कर्तव्य के मार्ग पर और सर्वनाश की छाया में
ये कब्रों में लगे मोतियों जैसे जमा हो गए।
वे पर्शियन तरंगों पर सोए हुए मौन हैं,
वे मिश्र की रेत पर फैले शंखों जैसे हैं,
वे पीले धनुष और बहादुर टूटे हाथों के साथ हैं
वे अचानक पैदा हो गए फूलों जैसे खिले हैं
वे फ्रांस के रक्त रंजित दलदलों में फंसे हैं
क्या मेरे आंसुओं के दर्द को तुम माप सकते हो
या मेरी घड़ी की दिशा को समझ करते हो
या मेरे हृदय की टूटन में शामिल गर्व को देख सकते हो
और उस आशा को, जो प्रार्थना की वेदना में शामिल है?
और मुझे दिखाई देने वाले दूरदराज के उदास भव्य दृश्य को
जो विजय के क्षति ग्रस्त लाल पर्दों पर लिखे हैं?
जब घृणा का आतंक और नाद समाप्त होगा
और जीवन शांति की धुरी पर एक नए रूप में चल पड़ेगा,
और तुम्हारा प्यार यादगार भरे धन्यवाद देगा,
उन कॉमरेड को जो बहादुरी से संघर्ष करते रहे,
मेरे शहीद बेटों के खून को याद रखना!

Sarojini Naidu Hindi के लेख में हम सरोजनी नायडू जी के कुछ इंग्लिश कविताओं पर भी नजर डालते है | आप को Sarojini Naidu Hindi का लेख और जानकारी कैसी लगी जरूर बताये जिससे हम आप को और भी अच्छी जानकारी दे सके |

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Pome List – Sarojini Naidu Best English Poems

Sarojini Naidu English Poems – A Love Song from the North

Tell me no more of thy love, papeeha,
Wouldst thou recall to my heart, papeeha,
Dreams of delight that are gone,
When swift to my side came the feet of my lover
With stars of the dusk and the dawn?
I see the soft wings of the clouds on the river,
And jewelled with raindrops the mango-leaves quiver,
And tender boughs flower on the plain…..
But what is their beauty to me, papeeha,
Beauty of blossom and shower, papeeha,
That brings not my lover again?
Tell me no more of thy love, papeeha,
Wouldst thou revive in my heart, papeeha
Grief for the joy that is gone?
I hear the bright peacock in glimmering woodlands
Cry to its mate in the dawn;
I hear the black koel’s slow, tremulous wooing,
And sweet in the gardens the calling and cooing
Of passionate bulbul and dove….
But what is their music to me, papeeha
Songs of their laughter and love, papeeha,
To me, forsaken of love?

Sarojini Naidu English Poems –  AN INDIAN LOVE SONG

He
Lift up the veils that darken the delicate moon
of thy glory and grace,
Withhold not, O love, from the night
of my longing the joy of thy luminous face,
Give me a spear of the scented keora
guarding thy pinioned curls,
Or a silken thread from the fringes
that trouble the dream of thy glimmering pearls;
Faint grows my soul with thy tresses’ perfume
and the song of thy anklets’ caprice,
Revive me, I pray, with the magical nectar
that dwells in the flower of thy kiss.

She

How shall I yield to the voice of thy pleading,
how shall I grant thy prayer,
Or give thee a rose-red silken tassel,
a scented leaf from my hair?
Or fling in the flame of thy heart’s desire the veils that cover my face,
Profane the law of my father’s creed for a foe
of my father’s race?
Thy kinsmen have broken our sacred altars and slaughtered our sacred kine,
The feud of old faiths and the blood of old battles sever thy people and mine.

He

What are the sins of my race, Beloved,
what are my people to thee?
And what are thy shrines, and kine and kindred,
what are thy gods to me?
Love recks not of feuds and bitter follies,
of stranger, comrade or kin,
Alike in his ear sound the temple bells
and the cry of the muezzin.
For Love shall cancel the ancient wrong
and conquer the ancient rage,
Redeem with his tears the memoried sorrow
that sullied a bygone age.

Sarojini Naidu English Poems – CORN GRINDERS

O little mouse, why dost thou cry
While merry stars laugh in the sky?

Alas! alas! my lord is dead!
Ah, who will ease my bitter pain?
He went to seek a millet-grain
In the rich farmer’s granary shed;
They caught him in a baited snare,
And slew my lover unaware:
Alas! alas! my lord is dead.

O little deer, why dost thou moan,
Hid in thy forest-bower alone?

Alas! alas! my lord is dead!
Ah! who will quiet my lament?

At fall of eventide he went
To drink beside the river-head;
A waiting hunter threw his dart,
And struck my lover through the heart.
Alas! alas! my lord is dead.

O little bride, why dost thou weep
With all the happy world asleep?

Alas! alas! my lord is dead!
Ah, who will stay these hungry tears,
Or still the want of famished years,
And crown with love my marriage-bed?
My soul burns with the quenchless fire
That lit my lover’s funeral pyre:
Alas! alas! my lord is dead.

Sarojini Naidu English Poems –  A Rajput Love Song – Sarojini Naidu Poems

(Parvati at her lattice)
O Love! were you a basil-wreath to twine
among my tresses,
A jeweled clasp of shining gold to bind around my sleeve,
O Love! were you the keora’s soul that haunts
my silken raiment,
A bright, vermilion tassel in the girdles that I weave;

O Love! were you the scented fan
that lies upon my pillow,
A sandal lute, or silver lamp that burns before my shrine,
Why should I fear the jealous dawn
that spreads with cruel laughter,
Sad veils of separation between your face and mine?

Haste, O wild-bee hours, to the gardens of the sunset!
Fly, wild-parrot day, to the orchards of the west!
Come, O tender night, with your sweet,
consoling darkness,
And bring me, my Beloved, to the shelter of my breast!

(Amar Singh in the saddle)
O Love! were you the hooded hawk upon my hand
that flutters,
Its collar-band of gleaming bells atinkle as I ride,
O Love! were you a turban-spray or
floating heron-feather,
The radiant, swift, unconquered sword
that swingeth at my side;

Sarojini Naidu English Poems – LEILI

THE serpents are asleep among the poppies,
The fireflies light the soundless panther’s way
To tangled paths where shy gazelles are straying,
And parrot-plumes outshine the dying day.
O soft! the lotus-buds upon the stream
Are stirring like sweet maidens when they dream.

A caste-mark on the azure brows of Heaven,
The golden moon burns sacred, solemn, bright
The winds are dancing in the forest-temple,
And swooning at the holy feet of Night.
Hush! in the silence mystic voices sing
And make the gods their incense-offering.

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Sarojini Naidu Hindi के इस पुरे लेख में हमने सरोजिनी नायडू जी के जीवन और कविताओं पर प्रकाश डाला है | जिसमे कुछ इंग्लिश  कविताएँ भी है | Sarojini Naidu Hindi के लेख में कोई त्रुटि हो या कोई और जानकारी आप साझा करना चाहते है तो हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताये जिससे हम और भी बेहतर हो सके |

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